उर्दू शायरी · ग़ज़ल

mane-e-ishq koi lakh hon hota kya hai

माने'-ए-'इश्क़ कोई लाख हों होता क्या है

مانع عشق کوئی لاکھ ہوں ہوتا کیا ہے

शायर: Ufuq Lakhnavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

माने'-ए-'इश्क़ कोई लाख हों होता क्या है
हम जो मरते हैं किसी पर तो किसी का क्या है

मर्दुम-ए-चश्म के आगे नहीं आते हम क्यों
अभी बच्चे हैं ये इन से तुम्हें पर्दा क्या है

कभी शोख़ी कभी मस्ती कभी ग़ुस्सा कभी शर्म
नहीं मा'लूम इन आँखों में तिरी क्या क्या है

चोली मस्की तो हुई कोई नई बात नहीं
और हम लोगों के पास आने में होता क्या है

आते हस्ती में हो क्यों ऐ मिरे यारान-ए-‘अदम
ख़ाक में मिलने से तुम लोगों को मिलता क्या है

जान-ए-शीरीं लब-ए-शीरीं पे जो देते हो 'उफ़ुक़'
नहीं मा'लूम कि इस में तुम्हें मीठा क्या है