उर्दू शायरी · ग़ज़ल

barae dasht-gardi baKHt ke chakkar se jate hain

बराए दश्त-गर्दी बख़्त के चक्कर से जाते हैं

برائے دشت گردی بخت کے چکر سے جاتے ہیں

शायर: Ufuq Lakhnavi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बराए दश्त-गर्दी बख़्त के चक्कर से जाते हैं
रहो तुम शाद ऐ अहल-ए-वतन हम घर से जाते हैं

नवेद ऐ ख़ार-ए-सहरा मुज़्दा ऐ दुश्वारी-ए-मंज़िल
कि हम राह-ए-वफ़ा-दारी में चश्म-ओ-सर से जाते हैं

कहाँ गुम-गश्ता-ए-राह-ए-स'आदत हैं उन्हें देखें
जो चलते हैं निगाहों में वो इस तेवर से जाते हैं

जिलौ में फ़ौज-ए-ग़म है अर्दली में लश्कर-ए-'उसरत
बयाबाँ में 'उफ़ुक़' हम ऐसे कर्र-ओ-फ़र से जाते हैं