उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jab hamein josh-e-junun su-e-bayaban le chala

जब हमें जोश-ए-जुनूँ सू-ए-बयाबाँ ले चला

جب ہمیں جوش جنوں سوئے بیاباں لے چلا

शायर: Ufuq Lakhnavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जब हमें जोश-ए-जुनूँ सू-ए-बयाबाँ ले चला
शहर से हमराह अपने फ़ौज-ए-तिफ़्लाँ ले चला

ज़ुल्म से तेरे हमें ग़म जान जाने का नहीं
हम निशाने पर खड़े हैं तीर तू हाँ ले चला

वो लिए जाते हैं इस दिल को जो लाया था उन्हें
मेज़बाँ को अपने घर में आज मेहमाँ ले चला

जान ले ले कर हथेली पर चले लाखों शहीद
सू-ए-मक़्तल जब वो अपनी तेग़-ए-बुर्राँ ले चला

और उम्मीदें बर आईं फ़ज़्ल-ए-ख़ालिक़ से 'उफ़ुक़'
फिर भी ग़म है दिल के मैं दिल ही में अरमाँ ले चला