उर्दू शायरी · ग़ज़ल

zahr-alud hai har sans nahin le sakte

ज़हर-आलूद है हर साँस नहीं ले सकते

زہر آلود ہے ہر سانس نہیں لے سکتے

शायर: Umair Najmi8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ज़हर-आलूद है हर साँस नहीं ले सकते
मर चुके हैं ये शजर साँस नहीं ले सकते

नींद की गोलियाँ लेते हैं वगरना हम लोग
रात के पिछले पहर साँस नहीं ले सकते

इतनी वुस'अत में घुटन इस को ख़ला कहते हैं
कि खुला घर है मगर साँस नहीं ले सकते

तंग बाज़ार में फ़ेहरिस्त लिए सोचते हैं
और क्या लेंगे अगर साँस नहीं ले सकते

दिल वो घर है कि जो ख़ाली है हवा-दार नहीं
आप रह सकते हैं पर साँस नहीं ले सकते

कैसे ले सकते हैं एहसान कोई डर के बग़ैर
हम तो बे-ख़ौफ़-ओ-ख़तर साँस नहीं ले सकते

बस इसी डर से कि धुँधलाए न वो आइना-रुख़
जब तक उस पर हो नज़र साँस नहीं ले सकते

ठोड़ी ख़ंजर की तरह सीने में चुभती है 'उमैर'
इस क़दर ख़म है कमर साँस नहीं ले सकते