उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun zindagi ke liye be-qarar hain hum log

यूँ ज़िंदगी के लिए बे-क़रार हैं हम लोग

یوں زندگی کے لئے بے قرار ہیں ہم لوگ

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ ज़िंदगी के लिए बे-क़रार हैं हम लोग
शिकायतों के लिए शर्मसार हैं हम लोग

अभी किसी की नज़र से रिहा हुए हैं हम
अभी किसी की नज़र में फ़रार हैं हम लोग

छुपा रहे हैं ग़मों को यूँ मुस्कुरा कर हम
नई सदी के नए इश्तिहार हैं हम लोग

शुमार यूँ तो हमारा कहीं नहीं लेकिन
सभी ये कहते हैं कि बे-शुमार हैं हम लोग

बिखर रहे हैं अभी हम सँवर रहे हैं अभी
कभी हैं ख़ुश तो कभी सोगवार हैं हम लोग

चुका रहे हैं अभी क़िस्त-ए-आरज़ू को हम
यूँ हसरतों के अभी क़र्ज़-दार हैं हम लोग

महक रही हैं फ़ज़ाएँ अभी पसीने से
नई उमीद की फ़स्ल-ए-बहार हैं हम लोग