उर्दू शायरी · ग़ज़ल

koi hai tir to koi kaman jaisa hai

कोई है तीर तो कोई कमान जैसा है

کوئی ہے تیر تو کوئی کمان جیسا ہے

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

कोई है तीर तो कोई कमान जैसा है
यहाँ यक़ीन भी सब का गुमान जैसा है

यहाँ पे आ के हमेशा सुकूँ मिला हम को
तुम्हारा घर भी हमारे मकान जैसा है

कमाल है कि किसी से वो कुछ नहीं कहता
ज़बान हो के भी वो बे-ज़बान जैसा है

क़दम क़दम पे नया इक सवाल है यारो
ये ज़िंदगी का सफ़र इम्तिहान जैसा है

हमारे सर पे खुला आसमान रहने दो
हमारे वास्ते ये साएबान जैसा है