उर्दू शायरी · ग़ज़ल

chahaton ka zara asar bhi ho

चाहतों का ज़रा असर भी हो

چاہتوں کا ذرا اثر بھی ہو

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

चाहतों का ज़रा असर भी हो
प्यार की आग अब इधर भी हो

रौशनी का पता करो यारो
रात है तो कहीं सहर भी हो

इन नज़ारों से कुछ नहीं होगा
कुछ हमारी नई नज़र भी हो

इन दीवारों में क़ैद हो शायद
उस ख़ुशी की हमें ख़बर भी हो

हो पता अब बहारों का हम को
वो ख़ुशी का समाँ इधर भी हो

हर घड़ी अब शिकायतें न कर
ज़िंदगी ख़ुशनुमा सफ़र भी हो