उर्दू शायरी · ग़ज़ल

agar wo jhuT bhi bole to hum sach man lete hain

अगर वो झूट भी बोले तो हम सच मान लेते हैं

اگر وہ جھوٹ بھی بولے تو ہم سچ مان لیتے ہیں

शायर: Ganesh Gaikwad Aaghaz5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अगर वो झूट भी बोले तो हम सच मान लेते हैं
नक़ाबों में छुपे चेहरों को हम पहचान लेते हैं

ज़रूरत तीर या तलवार की उन को नहीं होती
नज़र की मार से वो आशिक़ों की जान लेते हैं

वहाँ तो जिस को भी जाना है ख़ाली हाथ जाना है
न जाने लोग फिर क्यों इस क़दर सामान लेते हैं

इनायत की करम की इक नज़र करते हैं बदले में
कभी वो जान लेते हैं कभी ईमान लेते हैं

इरादे पर अटल रहते हैं ऐ 'आग़ाज़' हम अपने
वही सब कर गुज़रते हैं जो मन में ठान लेते हैं