उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun to ahbab ko sab achchha nazar aaega

यूँ तो अहबाब को सब अच्छा नज़र आएगा

یوں تو احباب کو سب اچھا نظر آئے گا

शायर: Aarib Hashmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ तो अहबाब को सब अच्छा नज़र आएगा
कोई मुफ़्लिस कोई दरमाँदा नज़र आएगा

फिर तुम्हें मेरी अज़िय्यत की समझ आएगी
जब कोई ख़्वाब तुम्हें आधा नज़र आएगा

चौक से सीधी गली घर की तरफ़ जाती है
मोड़ मुड़ते ही वो दरवाज़ा नज़र आएगा

तुम मिरी आँख से दुनिया को अगर देखोगे
फिर मोहब्बत में भी ख़म्याज़ा नज़र आएगा

चाँदनी रात में कुछ परियाँ वहाँ आती हैं
देखने के लिए शहज़ादा नज़र आएगा

देखते रहना कि अब मैं ने सफ़र करना है
देखने वालों को इक साया नज़र आएगा

अपनी आँखों को छलकने नहीं देना 'आरिब'
एक दरवेश तुम्हें प्यासा नज़र आएगा