उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise hote hain sar-e-sham numudar charagh

ऐसे होते हैं सर-ए-शाम नुमूदार चराग़

ایسے ہوتے ہیں سر شام نمودار چراغ

शायर: Aarib Hashmi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे होते हैं सर-ए-शाम नुमूदार चराग़
जैसे ढलते हुए सूरज के अज़ादार चराग़

एक ही आग में जलते हैं यहाँ हम दोनों
मिरा किरदार पतंगा तिरा किरदार चराग़

कर्बला और भला किस को यहाँ कहते हैं
नोक-ए-नेज़ा पे है सर और सर-ए-दार चराग़

कब कहाँ कैसे परखना है किसी को हम ने
सारे हालात से रहते हैं ख़बर-दार चराग़

रौशनी ढूँढने सब लोग वहाँ जाते हैं
या'नी उस पार अंधेरा है तो इस पार चराग़

ख़ुद ही आँधी की इनायत पे उन्हें छोड़ दिया
उस पे फिर ये भी तमाशा है कि बे-कार चराग़