उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dayar-e-ghair mein koi to aasra nikla

दयार-ए-ग़ैर में कोई तो आसरा निकला

دیار غیر میں کوئی تو آسرا نکلا

शायर: Aarib Hashmi4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दयार-ए-ग़ैर में कोई तो आसरा निकला
वो अजनबी था मिरे अपने गाँव का निकला

वगर्ना कौन मोहब्बत यहाँ निभा पाता
ख़ुदा का शुक्र जुदाई का रास्ता निकला

मैं सब को राह दिखाते यहाँ तलक आया
फिर अपने घर का पता पूछता हुआ निकला

मैं एक उम्र जिसे संग ही समझता रहा
वो एक शख़्स मोहब्बत में मुब्तला निकला