उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ghaT ke pas se guzregi magar dhyan rahe

घाट के पास से गुज़रेगी मगर ध्यान रहे

گھاٹ کے پاس سے گزرے گی مگر دھیان رہے

शायर: Aarib Hashmi10 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

घाट के पास से गुज़रेगी मगर ध्यान रहे
फ़ालतू बात न करना कि मेरा मान रहे

ग़ैर-महसूस तरीक़े से तुझे देखना है
ग़ैर-तरतीब नज़र मेरी परेशान रहे

तेरी आवाज़ से पहले था फ़क़त शोर यहाँ
या'नी हम सौत-ओ-सदा से भी परेशान रहे

घर से निकला हूँ दु'आ कोई नहीं मेरे साथ
मो'जिज़ा होगा अगर रास्ता आसान रहे

ये ख़ुशी है कि मुझे देख के पहचान लिया
और दुख ये कि मिरे हाल से अंजान रहे

तेरे आने पे कई फूल खिले थे जिन में
तेरे जाने से वो गुलदान परेशान रहे

हाँ मगर खिड़कियाँ खुलने लगी चिल्लाने से
दर-ओ-दीवार कि बे-जान थे बे-जान रहे

सामना हो तो पशेमानी न हो चेहरों पर
कम से कम इतना त'अल्लुक़ तो मिरी जान रहे

सिलसिला-वार गुज़रती रहे ये 'उम्र-ए-रवाँ
साँस-दर-साँस हर इक मरहला आसान रहे

काँपते हाथ से उस बुत को छुआ था 'आरिब'
क्या 'अजब है कि सलामत मिरा ईमान रहे