उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dekhna bhi to teri baat ka ek Dhang lage

देखना भी तो तिरी बात का इक ढंग लगे

دیکھنا بھی تو تری بات کا اک ڈھنگ لگے

शायर: Aarib Hashmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

देखना भी तो तिरी बात का इक ढंग लगे
तू ने देखा जिसे इक बार उसे रंग लगे

ऐन मुमकिन है क़बीले में बग़ावत होना
ऐन मुमकिन है तिरे नाम पे इक जंग लगे

तू न जिस रास्ते पे जाए वहाँ धूल उड़े
तू न जिस आइने में हो सो उसे ज़ंग लगे

सोचते सोचते वुसअ'त भी अता होती है
देखते देखते नज़रों को ख़ला तंग लगे

इश्क़ वाले उसे गुल-पाशी कहा करते हैं
हुस्न वालों के मोहल्ले में अगर संग लगे