उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ek tartib se jab ashk numudar hue

एक तरतीब से जब अश्क नुमूदार हुए

ایک ترتیب سے جب اشک نمودار ہوئے

शायर: Aarib Hashmi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

एक तरतीब से जब अश्क नुमूदार हुए
फिर ये जाना कि मोहब्बत में गिरफ़्तार हुए

अब मिरी नींद के रस्ते में खड़े रहते हैं
चंद साए जो मिरे ख़ौफ़ से तय्यार हुए

तिरे बदले हुए लहजे ने रवय्या बदला
ऐसे बदले कि तिरे नाम से बेज़ार हुए

अब तो कोई भी नहीं हाल सुनाएँ जिस को
मुद्दतें हो गईं बे-यार-ओ-मददगार हुए

ता-दम-ए-मर्ग सियह-पोश हमें रहना है
या'नी हम लोग तो पैदा ही अज़ादार हुए