उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yun pi raha hun jaise koi pyas hi nahin

यूँ पी रहा हूँ जैसे कोई प्यास ही नहीं

یوں پی رہا ہوں جیسے کوئی پیاس ہی نہیں

शायर: Saani Araryavi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यूँ पी रहा हूँ जैसे कोई प्यास ही नहीं
साग़र हमारे दिल को ज़रा रास ही नहीं

मैं यूँ ही जी रहा हूँ तिरी काएनात में
मुझ को तो ज़िंदगी से कोई आस ही नहीं

पैहम तलाश जारी है इस दिल की दर-ब-दर
या'नी कि मेरा दिल है मिरे पास ही नहीं

कैसे लुभेगा वो बुत-ए-नाज़ुक शब-ए-विसाल
क्या डालिए कि पास कोई घास ही नहीं

हज़रत के पीछे हो के भी मंज़िल नहीं मिली
कि गुमरही का ख़िज़्र को एहसास ही नहीं

राज़-ए-ख़िरद जुनूँ की हिकायात-ए-ख़ूँ-चकाँ
सब कुछ मिरी ग़ज़ल में है बकवास ही नहीं