उर्दू शायरी · ग़ज़ल

wabaal hi wabaal hai zamin se aasman tak

वबाल ही वबाल है ज़मीं से आसमान तक

وبال ہی وبال ہے زمیں سے آسمان تک

शायर: Saani Araryavi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

वबाल ही वबाल है ज़मीं से आसमान तक
हयात पुर-मलाल है ज़मीं से आसमान तक

सुकूँ न फ़र्श पर मिला न चैन 'अर्श पर मिला
बता तू किस की चाल है ज़मीं से आसमान तक

तिरे हसीन रुख़ से ही जहाँ हुआ है नूर नूर
तिरा ही तू जमाल है ज़मीं से आसमान तक

मिरे जुनून-ए-शौक़ ने 'अजब ही गुल खिलाए हैं
कमाल ही कमाल है ज़मीं से आसमान तक

क़रीब से हर एक शय को हम ने देखा ग़ौर से
ये ख़ूब ए'तिदाल है ज़मीं से आसमान तक

जुनूँ का इस जहान में जो हाल था सो हाल है
ख़िरद भी पाएमाल है ज़मीं से आसमान तक

मियाँ किसी भी हाल में न टूटे दिल का आइना
इसी की देख भाल है ज़मीं से आसमान तक