उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manzar pe nazar hai pas-e-manzar nahin dekha

मंज़र पे नज़र है पस-ए-मंज़र नहीं देखा

منظر پہ نظر ہے پس منظر نہیں دیکھا

शायर: Saani Araryavi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मंज़र पे नज़र है पस-ए-मंज़र नहीं देखा
ज़ाहिर के तमाशों से गुज़र कर नहीं देखा

धड़कन की ज़बाँ से न सुनी दिल की कहानी
आँखों को मिरी आप ने पढ़ कर नहीं देखा

कहता है कि तू मेरे बिना रह नहीं सकता
ये बात है तो क्यूँ कभी मर कर नहीं देखा

मैं था कि मिरी क़िस्मत-ए-इम्काँ में थी पस्ती
तुम थे कि बुलंदी से उतर कर नहीं देखा

आँखों में समाया नहीं वो ख़्वाब-ए-परेशाँ
और ख़ाना-ए-दिल में भी ठहर कर नहीं देखा