उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yunhi be-wajh to wo humse na bichhDa hoga

युँही बे-वज्ह तो वो हम से न बिछड़ा होगा

یوںہی بے وجہ تو وہ ہم سے نہ بچھڑا ہوگا

शायर: Daniyal Haider Jafri7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

युँही बे-वज्ह तो वो हम से न बिछड़ा होगा
कुछ न कुछ उस ने बिछड़ते हुए सोचा होगा

क्या कहें सोच के आता है कलेजा मुँह को
किस तरह ग़ैर के पहलू में वो बैठा होगा

ख़ुद-कुशी कह के न टालो इसे तहक़ीक़ करो
उस को यारों ने ही खाई में धकेला होगा

गो मुझे भूल गया था वो मगर ये तय है
वो सर-ए-राह मुझे देख के चौंका होगा

क्या उसे मेरी तबी'अत की भी अब फ़िक्र नहीं
या किसी दोस्त से उस ने मिरा पूछा होगा

तू ने जो शख़्स चुना है ये यक़ीं है मुझ को
मुझ से बढ़ कर वो तिरे पहलू में जचता होगा

ऐ मिरी जान-ए-ग़ज़ल ये तो बता वो 'हैदर'
वो जो शा'इर था तुझे याद तो आता होगा