उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bar-e-digar ghazal ki zamin dekhiye huzur

बार-ए-दिगर ग़ज़ल की ज़मीं देखिए हुज़ूर

بار دگر غزل کی زمیں دیکھیے حضور

शायर: Daniyal Haider Jafri6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बार-ए-दिगर ग़ज़ल की ज़मीं देखिए हुज़ूर
जब जब हमारा क़ल्ब-ए-हज़ीं देखिए हुज़ूर

उन की निगाह-ए-कश्फ़ का जादू समेटिए
वो बस जिधर दिखाएँ वहीं देखिए हुज़ूर

मतलूब है सुकून-ए-दिल-ए-ज़ार की जगह
दैर-ओ-हरम से हट के कहीं देखिए हुज़ूर

मेरे तमाम ख़्वाब हैं आँखों में मुंजमिद
ख़ाली हथेलियों को नहीं देखिए हुज़ूर

कहते थे ये मकान उसी ला-मकाँ का है
जब बन गया मकाँ तो मकीं देखिए हुज़ूर

'हैदर' हवस को 'इश्क़ की चादर में ढाँप कर
फिरता है बन के पर्दा-नशीं देखिए हुज़ूर