उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aise aabaad hun duniya mein ki barbaad hun main

ऐसे आबाद हूँ दुनिया में कि बर्बाद हूँ मैं

ایسے آباد ہوں دنیا میں کہ برباد ہوں میں

शायर: Daniyal Haider Jafri8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ऐसे आबाद हूँ दुनिया में कि बर्बाद हूँ मैं
दिल मिरा ख़ुश है मगर माइल-ए-फ़रियाद हूँ मैं

मैं गिरफ़्तार परिंदों को भी आज़ाद करूँ
और दुनिया ये समझती है कि सय्याद हूँ मैं

लोग सीखेंगे मोहब्बत के सलीक़े मुझ से
जान-ए-जाँ राँझा-ओ-मजनूँ का भी उस्ताद हूँ मैं

तू तो शीरीं के कफ़-ए-पा के बराबर भी नहीं
क्या तक़ाबुल है तिरा मुझ से कि फ़रहाद हूँ मैं

'इश्क़ ने ही मुझे जीने का हुनर बख़्शा है
मत समझना कि यहाँ 'इश्क़ में बेदाद हूँ मैं

क्या लगे कोई मुझे याद करे या न करे
बस मुझे इतना ही काफ़ी है उसे याद हूँ मैं

पूछ मत मुझ से मिरे गिर्या-ओ-मातम का सबब
तेरे इस तरह बिछड़ने पे ही नाशाद हूँ मैं

मेरा पूछे जो पता कोई बताना 'हैदर'
उस की यादों के ही इक शहर में आबाद हूँ मैं