उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye tamanna hai ki main harf-e-wafa ho jaun

ये तमन्ना है कि मैं हर्फ़-ए-वफ़ा हो जाऊँ

یہ تمنا ہے کہ میں حرف وفا ہو جاؤں

शायर: Lokesh Kumar Singh9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये तमन्ना है कि मैं हर्फ़-ए-वफ़ा हो जाऊँ
मेरी बातें रहें बे-शक मैं फ़ना हो जाऊँ

मेरे किरदार से अच्छाई की ख़ुशबू आए
हर बुराई के लिए मैं तो बुरा हो जाऊँ

सब को बेदार करूँ ओम की आवाज़ से मैं
वो जो आती है अज़ाँ से वो सदा हो जाऊँ

जिस में तहज़ीबों के गुल साथ खिला करते थे
फिर मिरे मुल्क की वो आब-ओ-हवा हो जाऊँ

वो जो हिजरत के सबब छोड़ गए हैं घर को
उन्ही बिछड़े हुए अपनों का पता हो जाऊँ

इसी उम्मीद पे दिन काट दिए हैं मैं ने
ज़िंदगी मैं तिरी रातों का दिया हो जाऊँ

रूठ कर फिर से छुपूँ घर के किसी कोने में
इक खिलौने के लिए सब से ख़फ़ा हो जाऊँ

जो मुझे छोड़ के जाते हैं वो पंछी सुन लें
कल नई रुत में फलों से न लदा हो जाऊँ

रेत के घर जो बनाते हैं यहाँ साहिल पर
उन्ही मासूम से बच्चों की दुआ हो जाऊँ