उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apni sanson se hum Dare kitne

अपनी साँसों से हम डरे कितने

اپنی سانسوں سے ہم ڈرے کتنے

शायर: Lokesh Kumar Singh8 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपनी साँसों से हम डरे कितने
ज़िंदगी के लिए मरे कितने

दोस्ती प्यार ज़र्फ़ हमदर्दी
हम ने देखे हैं कटघरे कितने

ये जो खोटे हैं बस्तियों के हैं
लोग जंगल के थे खरे कितने

क़हक़हा एक भी न कट पाया
मेरे आँसू थे भोंथरे कितने

कैसी बारिश हुई है अब के बरस
पेड़ मुरझा गए हरे कितने

कितनी चिकनी समाअ'तें हैं यहाँ
शे'र मेरे हैं खुरदुरे कितने

हम को तो तिश्नगी का नश्शा है
कोई अब जाम भी भरे कितने

एक सहरा सा रह गया 'साहिल'
अब्र दरिया पे ही झरे कितने