उर्दू शायरी · ग़ज़ल

kya bataun tumhein ki kya hun main

क्या बताऊँ तुम्हें कि क्या हूँ मैं

کیا بتاؤں تمہیں کہ کیا ہوں میں

शायर: Lokesh Kumar Singh13 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

क्या बताऊँ तुम्हें कि क्या हूँ मैं
भर चुके ज़ख़्म की दवा हूँ मैं

जिस की ख़्वाहिश ही गुमरही ठहरी
ख़्वाहिशों का वो क़ाफ़िला हूँ मैं

क्यों मुझे घेर कर के बैठे हो
ऐ ग़मो आदमी बुरा हूँ मैं

ये जो बदनाम ख़त हैं इन का ही
लोग कहते हैं हाशिया हूँ मैं

आख़िरी हर्फ़ हूँ तबस्सुम का
और अश्कों की इब्तिदा हूँ मैं

ये मिरी ज़िंदगी बताएगी
कितनी क़िस्तों में कब मरा हूँ मैं

आज की शाम घर न लौटूँगा
सुब्ह अक्सर ये सोचता हूँ मैं

सारी दुनिया को है ख़याल मिरा
किस तग़ाफ़ुल का सिलसिला हूँ मैं

जिस की ख़ुद की ही कोई ठोर नहीं
एक ऐसा ही आसरा हूँ मैं

वो जो चीख़ों में हो गई तब्दील
गूँगी बहरी वही सदा हूँ मैं

उस का लहजा अखर रहा है क्यों
क्या उसे चाहने लगा हूँ मैं

जब से अम्माँ ने रुख़्सती ली है
चाँद को पहरों देखता हूँ मैं

क्यों है उजड़ा हुआ मिरा 'साहिल'
किस समुंदर की बद-दुआ' हूँ मैं