उर्दू शायरी · ग़ज़ल

aaina phir nikhar gaya hai kya

आइना फिर निखर गया है क्या

آئنہ پھر نکھر گیا ہے کیا

शायर: Lokesh Kumar Singh7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

आइना फिर निखर गया है क्या
मेरा चेहरा उतर गया है क्या

फिर निशाँ पीठ पर नया उभरा
फिर कोई दोस्त मर गया है क्या

कब से मौसम है सर्द रातों का
मेरा सूरज गुज़र गया है क्या

दिल की यादें है सब क़रीने से
तो ये बच्चा सुधर गया है क्या

कब से अख़्तर-शुमार हैं आँखें
कोई सपना बिखर गया है क्या

क्यों गुमाँ है मिरे यक़ीं पे तुम्हें
कोई वा'दा मुकर गया है क्या

कितना वीरान सा है अब 'साहिल'
काम सैलाब कर गया है क्या