उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kaisi aazmaish ho rahi hai

ये कैसी आज़माइश हो रही है

یہ کیسی آزمائش ہو رہی ہے

शायर: Nabiya Irfan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कैसी आज़माइश हो रही है
ग़मों की हम पे बारिश हो रही है

तमाशा बन रहा है ज़िंदगी का
मिरे ग़म की नुमाइश हो रही है

यहाँ मैं फ़िक्र में उन की घुली हूँ
वहाँ साज़िश पे साज़िश हो रही है

नक़ाबों में छुपे हैं अस्ल चेहरे
यहाँ तो बस नुमाइश हो रही है

दु'आएँ माँगते हैं ज़िंदगी की
मगर मरने की ख़्वाहिश हो रही है

ये नाकामी हमारा हौसला है
इसी से हम को काविश हो रही है

'नबिय्या' हम हैं ख़ाली हाथ फिर भी
जहाँ वालों को सोज़िश हो रही है