उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adhuri KHwahishen dil mein adhure KHwab rahte hain

अधूरी ख़्वाहिशें दिल में अधूरे ख़्वाब रहते हैं

ادھوری خواہشیں دل میں ادھورے خواب رہتے ہیں

शायर: Nabiya Irfan5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अधूरी ख़्वाहिशें दिल में अधूरे ख़्वाब रहते हैं
हमारी धड़कनों में अब अधूरे बाब रहते हैं

ये लब ख़ामोश हैं लेकिन निगाहें बोलती सी हैं
कई तूफ़ाँ मचलने के लिए बेताब रहते हैं

कि इस तारीक शब में अब मिरे रहबर हैं ये जुगनू
वो जिन की रौशनी में रास्ते पुर-ताब रहते हैं

कहीं तपती ज़मीं इक बूँद पानी को तरसती है
कहीं बादल बरसने के लिए बेताब रहते हैं

कि ज़द में आँधियों के जब से मेरा आशियाना है
'नबिय्या' क्यों ख़फ़ा मुझ से मिरे अहबाब रहते हैं