उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye chehre se parda haTate nahin hain

ये चेहरे से पर्दा हटाते नहीं हैं

یہ چہرے سے پردا ہٹاتے نہیں ہیں

शायर: Nabiya Irfan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये चेहरे से पर्दा हटाते नहीं हैं
जो सच है उसे क्यों दिखाते नहीं हैं

ये दौलत के आगे तो झुकते हैं लेकिन
ख़ुदा के लिए सर झुकाते नहीं हैं

जो गिर जाए कोई तो हँसते हैं उस पर
ये गिरते हुए को उठाते नहीं हैं

लबों पर सजाते हैं झूटे तबस्सुम
नज़र से नज़र पर मिलाते नहीं हैं

नहीं है ज़रूरी ग़मों की नुमाइश
यही सोच कर हम बताते नहीं हैं

मोहब्बत के वा'दे तो करते हैं लेकिन
मोहब्बत के वा'दे निभाते नहीं हैं

हक़ीक़त तो दुनिया की सब जानते हैं
पर आँखों से पर्दा हटाते नहीं हैं