उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye dil ab DhunDhta rahen wahi hai

ये दिल अब ढूँढता राहें वही है

یہ دل اب ڈھونڈھتا راہیں وہی ہے

शायर: Nabiya Irfan7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये दिल अब ढूँढता राहें वही है
वो जिन राहों पे मंज़िल खो गई है

नज़र आती नहीं है इक किरन भी
यहाँ हर सम्त अब तो तीरगी है

नहीं इक ग़ुंचा भी बाक़ी चमन में
ख़िज़ाँ जैसे यहाँ पर थम गई है

कहाँ से ढूँढ कर लाऊँ वो लम्हे
कि जिन से ज़िंदगी शादाँ रही है

नहीं क़ाबिल मोहब्बत के वो तेरी
तू जिस के प्यार का दम भर रही है

है तेरा रब हमेशा साथ तेरे
तिरी आँखों में क्यूँकर बेबसी है

नहीं है दोस्त अब कोई 'नबिय्या'
क़लम से ही हमारी दोस्ती है