उर्दू शायरी · ग़ज़ल

nai hasraten sar uThati nahin hain

नई हसरतें सर उठाती नहीं हैं

نئی حسرتیں سر اٹھاتی نہیں ہیں

शायर: Nabiya Irfan6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

नई हसरतें सर उठाती नहीं हैं
ये टूटी उमीदें रुलाती नहीं हैं

ठहरती नहीं है नज़र ये कहीं पे
कि अब रौनक़ें हम को भाती नहीं हैं

है मुश्किल बहुत आज सच को छुपाना
हक़ीक़त तो नज़रें चुराती नहीं हैं

ये कैसी समुंदर में है इज़्तिराबी
समुंदर में मौजें समाती नहीं हैं

न कुछ मिल सकेगा जो ख़ामोश बैठे
कि ख़ुद मंज़िलें पास आती नहीं हैं

चलोगे तो रस्ते बनेंगे 'नबिय्या'
हवाएँ तो रस्ते बनाती नहीं हैं