उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kaise kah dun ki kuchh tum se wasta hi nahin

ये कैसे कह दूँ कि कुछ तुम से वास्ता ही नहीं

یہ کیسے کہہ دوں کہ کچھ تم سے واسطہ ہی نہیں

शायर: Danish Aligarhi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कैसे कह दूँ कि कुछ तुम से वास्ता ही नहीं
बिछड़ के तुम से कहीं और दिल लगा ही नहीं

नज़र मिला के किया बे-नियाज़-ए-होश मुझे
तुम्हारी नज़रों में जैसे कि कुछ हुआ ही नहीं

मुझे सताएँगी क्या गर्दिशें ज़माने की
मैं कल के बारे में ऐ दोस्त सोचता ही नहीं

ये अहल-ए-बज़्म मुझे देखते हैं हैरत से
मैं जिस को देख रहा हूँ वो देखता ही नहीं

सुकून-ए-क़ल्ब-ओ-जिगर लूट ले गया 'दानिश'
एक ऐसा शख़्स कि जिस को मैं जानता ही नहीं