उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ab nahin koi mere dil ko dukhane wala

अब नहीं कोई मिरे दिल को दुखाने वाला

اب نہیں کوئی مرے دل کو دکھانے والا

शायर: Danish Aligarhi5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अब नहीं कोई मिरे दिल को दुखाने वाला
याद आता है बहुत रूठ के जाने वाला

गर्दिश-ए-वक़्त मिटा मुझ को मगर याद रहे
फिर नहीं कोई तिरा नाज़ उठाने वाला

जब भी आएगी मिरी याद तड़प जाएगा
अपनी महफ़िल को मिरे बा'द सजाने वाला

जिस की ख़ातिर लिए इल्ज़ाम जहाँ के मैं ने
ये वही शख़्स है मुँह फेर के जाने वाला

कोई मुख़्लिस न मिला ऐसा जहाँ में 'दानिश'
मेरी बर्बादी पे दो अश्क बहाने वाला