उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil se tere KHayal ko kaise bhulaen hum

दिल से तिरे ख़याल को कैसे भुलाएँ हम

دل سے ترے خیال کو کیسے بھلائیں ہم

शायर: Danish Aligarhi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल से तिरे ख़याल को कैसे भुलाएँ हम
ये ऐसी चीज़ कब है जिसे भूल जाएँ हम

यूँ भी गुज़र ही जाएँगे लम्हे हयात के
तुम मुस्कुराओ अंजुमन-ए-ग़म सजाएँ हम

ओ देने वाले हम को ख़ुशी दे कि रंज दे
लेकिन रहे ख़याल कि घबरा न जाएँ हम

इतनी ख़ुशी न बख़्श कि आँसू निकल पड़ें
ग़म भी न इस क़दर हों कि हँसने न पाएँ हम

रूठी हुई है मौत भी दुनिया के साथ साथ
अब ऐसी ज़िंदगी को कहाँ ले के जाएँ हम

लिल्लाह यूँ निगाह-ए-करम से न देखिए
ग़म छिन गया तो डर है कहीं मर न जाएँ हम

मरना वक़ार-ए-‘इश्क़ पे ‘ऐन-ए-हयात है
'दानिश' अजल से किस लिए दामन बचाएँ हम