उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ajib qaid lagai hai tumne pyar ke sath

'अजीब क़ैद लगाई है तुम ने प्यार के साथ

عجیب قید لگائی ہے تم نے پیار کے ساتھ

शायर: Danish Aligarhi6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

'अजीब क़ैद लगाई है तुम ने प्यार के साथ
ख़िज़ाँ-नसीब रहूँ रह के मैं बहार के साथ

ग़म-ए-हयात से मुमकिन नहीं है छुटकारा
तिरा ख़याल भी है फ़िक्र-ए-रोज़गार के साथ

क़रीब होंटों के लबरेज़ जाम छलकाना
'अजब मज़ाक़ है साक़ी ये बादा-ख़्वार के साथ

मिरा ख़याल है तुम भी न तोड़ पाओगे
इक ऐसा रिश्ता-ए-मोहकम है इंतिज़ार के साथ

ये और बात उठाते हैं उँगलियाँ दुश्मन
मुझे ख़ुशी है लुटा हूँ मैं रह के यार के साथ

लुटा के अपना सभी कुछ बहुत हूँ ख़ुश 'दानिश'
ख़याल उन की ख़ुशी का था अपनी हार के साथ