उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil ki basti ko masarrat se sajae rakhiye

दिल की बस्ती को मसर्रत से सजाए रखिए

دل کی بستی کو مسرت سے سجائے رکھیے

शायर: Danish Aligarhi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल की बस्ती को मसर्रत से सजाए रखिए
यार के ग़म को मुक़द्दर ही बनाए रखिए

ज़ौक़-ए-दीदार को कुछ और बढ़ाए रखिए
चाँद से चेहरे को चिलमन में छुपाए रखिए

कल बिछड़ जाएँ तो रह जाएँगी यादें बाक़ी
आज तो सारे हिजाबात उठाए रखिए

ये वो दौलत है जो क़िस्मत से मिला करती है
प्यार के दर्द को सीने से लगाए रखिए

फिर अंधेरे मिरी राहों में न आ जाएँ कहीं
अपनी उल्फ़त से मिरे दिल को जलाए रखिए

चश्म-ए-दुनिया को कहाँ दीद का हासिल है शु'ऊर
रू-ए-रौशन को हिजाबों में छुपाए रखिए

दिल-ए-'दानिश' न हमेशा के लिए रुक जाए
आप सीने से ज़रा हाथ लगाए रखिए