उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye kaisa dil hai kaisi dil-lagi hai

ये कैसा दिल है कैसी दिल-लगी है

یہ کیسا دل ہے کیسی دل لگی ہے

शायर: Umr Daraz Hashir9 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये कैसा दिल है कैसी दिल-लगी है
तिरे होते हुए भी कुछ कमी है

मिरे अंदर बपा है शोर इतना
मिरे अतराफ़ जितनी ख़ामुशी है

मैं तेरी जुस्तुजू में अब वहाँ हूँ
अंधेरा है जहाँ न रौशनी है

वो कल शब ख़्वाब में आई हुई थी
मिरी आँखों से ख़ुशबू आ रही है

नज़र रक्खी हुई है तू ने मुझ पर
ख़ुदा है तू या कोई आदमी है

मैं ना-फ़रमान हूँ तो क्या बुरा है
कि ये भी तो जवाज़-ए-बंदगी है

मिरे चेहरे पे ज़ख़्मों के निशाँ हैं
मिरे चेहरे पे कितनी ताज़गी है

हवा भी है बदन भी टूटता है
मगर माचिस में तीली आख़िरी है

मैं सारी मंज़िलें तय कर चुका हूँ
मिरी क़िस्मत में अब आवारगी है