उर्दू शायरी · ग़ज़ल

jhuT ko sach ke libaade mein nahin rakkhunga

झूट को सच के लिबादे में नहीं रक्खूँगा

جھوٹ کو سچ کے لبادے میں نہیں رکھوں گا

शायर: Umr Daraz Hashir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

झूट को सच के लिबादे में नहीं रक्खूँगा
मैं किसी शख़्स को धोके में नहीं रक्खूँगा

मैं उगल डालूँगा जो कुछ भी है मेरे दिल में
तीर पैवस्त मैं सीने में नहीं रक्खूँगा

ज़िंदगी तुझ पे मैं लिक्खूंगा फ़साना और फिर
कोई राय तिरे बारे में नहीं रक्खूँगा

अपने ही बाज़ू पे रक्खूँगा भरोसा अब के
मैं दुआओं को सफ़ीने में नहीं रक्खूँगा

बाँट ले जो मिरी तन्हाई मिरा ग़म ऐसी
कोई भी चीज़ मैं कमरे में नहीं रक्खूँगा