उर्दू शायरी · ग़ज़ल

adh-bujhi cigareten paDi hui hain

अध-बुझी सिगरटें पड़ी हुई हैं

ادھ بجھی سگرٹیں پڑی ہوئی ہیں

शायर: Umr Daraz Hashir5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अध-बुझी सिगरटें पड़ी हुई हैं
राएगाँ कोशिशें पड़ी हुई हैं

दश्त में किस ने शब गुज़ारी है
रेत पर सिलवटें पड़ी हुई हैं

चल रहा हूँ जो मैं सुहूलत से
सैंकड़ों ठोकरें पड़ी हुई हैं

मैं ने देखा है इक जहन्नुम में
कितनी ही जन्नतें पड़ी हुई हैं

इश्क़ है तुझ से या मुझे तेरी
आदतन आदतें पड़ी हुई हैं