उर्दू शायरी · ग़ज़ल

junun ko tari na karta to aur kya karta

जुनूँ को तारी न करता तो और क्या करता

جنوں کو طاری نہ کرتا تو اور کیا کرتا

शायर: Umr Daraz Hashir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

जुनूँ को तारी न करता तो और क्या करता
फ़क़ीर मस्ती न करता तो और क्या करता

मिरे अलावा कोई हम-सफ़र न था मेरा
मैं ख़ुद-कलामी न करता तो और क्या करता

मैं आ गया था मोहब्बत की आख़िरी हद तक
मैं बेवफ़ाई न करता तो और क्या करता

समा गई थी मिरे सर में रेल की छुक छुक
मैं ख़ुद-कुशी ही न करता तो और क्या करता

वो सीधी बात हमेशा उलट समझता था
मैं बात उल्टी न करता तो और क्या करता

मैं सुनना चाहता था शोर अपने अंदर का
मैं बंद खिड़की न करता तो और क्या करता