उर्दू शायरी · ग़ज़ल

guzishta KHwab ki tabir mein laga hua tha

गुज़िश्ता ख़्वाब की ता'बीर में लगा हुआ था

گزشتہ خواب کی تعبیر میں لگا ہوا تھا

शायर: Umr Daraz Hashir4 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

गुज़िश्ता ख़्वाब की ता'बीर में लगा हुआ था
मैं उस को छूने की तदबीर में लगा हुआ था

बना सबब वही मक़बूलियत का लोगों में
वो एक दाग़ जो तस्वीर में लगा हुआ था

किसी के जिस्म ने मुझ को बहुत सदाएँ दीं
मगर मैं रूह की तस्ख़ीर में लगा हुआ था

उसी ने तीरगी बख़्शी है मेरी आँखों को
मैं जिस चराग़ की ता'मीर में लगा हुआ था