उर्दू शायरी · ग़ज़ल

gham hai ya phir ye gham-shanasi hai

ग़म है या फिर ये ग़म-शनासी है

غم ہے یا پھر یہ غم شناسی ہے

शायर: Umr Daraz Hashir6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ग़म है या फिर ये ग़म-शनासी है
मेरे अंदर बहुत उदासी है

बाँझ मंज़र भी देख कर ख़ुश हूँ
जाने कैसी ये बद-हवासी है

ख़ामुशी का तवील जंगल है
और कहीं दूर इक सदा सी है

और कुछ देर में नहीं होगी
मुझ पे जो ताज़गी ज़रा सी है

मैं भी बंदों से प्यार करता हूँ
इक सिफ़त मुझ में ये ख़ुदा सी है

नज़्म ग़ज़लें फ़साने लिखना भी
एक तरह की बे-लिबासी है