उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye gulabi gulabi nasha chha raha

ये गुलाबी गुलाबी नशा छा रहा

یہ گلابی گلابی نشہ چھا رہا

शायर: Chandrakant Rawat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये गुलाबी गुलाबी नशा छा रहा
कौन दिल में हमारे चला आ रहा

किस की ख़ुशबू हवाओं में फैली हुई
किस का दामन फ़ज़ाओं में लहरा रहा

कौन रू-पोश है किस की आग़ोश है
जिस्म किस की तपिश से घुला जा रहा

जूँ घटाएँ घनेरी घिरी आ रहीं
ख़्वाब सा क्या निगाहों से टकरा रहा

इक फ़रिशताई आवाज़ है आ रही
आसमाँ से उधर कौन है गा रहा

अपनी हस्ती से क़ाबू उठा जा रहा
जैसे जादू सा हम पे हुआ जा रहा