उर्दू शायरी · ग़ज़ल

dil mein aainda mere ye be-qarari ho na ho

दिल में आइंदा मिरे ये बे-क़रारी हो न हो

دل میں آئندہ مرے یہ بے قراری ہو نہ ہو

शायर: Chandrakant Rawat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दिल में आइंदा मिरे ये बे-क़रारी हो न हो
आप का अरमान फिर यूँ जाँ पे भारी हो न हो

जी भी लेने दे इसी लम्हा मुझे मरने भी दे
ज़िंदगी कि फिर कभी ऐसी ख़ुमारी हो न हो

इक दफ़'अ उठ कर मिरी जानिब झुकी ही रह गई
मेरी बाबत उस नज़र से हुक्म जारी हो न हो

आप की यादें रहीं सीने में ज़िंदा चाहे फिर
आप का दीदार मुझ को 'उम्र सारी हो न हो

अपना पैग़ाम-ए-जुदाई ख़ुद ही मैं ले कर चलूँ
क्यूँकि क़ासिद को ख़याल-ए-राज़दारी हो न हो