उर्दू शायरी · ग़ज़ल

manta hun badal raha hun main

मानता हूँ बदल रहा हूँ मैं

مانتا ہوں بدل رہا ہوں میں

शायर: Chandrakant Rawat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

मानता हूँ बदल रहा हूँ मैं
तेरे साँचे में ढल रहा हूँ मैं

ख़्वाब सा क्या है जिस के पीछे हूँ
नींद में जैसे चल रहा हूँ मैं

वक़्त छू कर चला गया मुझ को
और अब हाथ मल रहा हूँ मैं

इक नई ज़िंदगी की चाहत है
ख़ुद से बाहर निकल रहा हूँ मैं

बारहा क्यों गुमान होता है
तेरे दिल का ख़लल रहा हूँ मैं

ज़िंदगी राह पर नहीं आती
लाख चालें बदल रहा हूँ मैं