उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye gham naya hai purane har gham se muKHtalif hai

ये ग़म नया है पुराने हर ग़म से मुख़्तलिफ़ है

یہ غم نیا ہے پرانے ہر غم سے مختلف ہے

शायर: Umair Najmi7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये ग़म नया है पुराने हर ग़म से मुख़्तलिफ़ है
सो मेरा गिर्या भी 'आम मातम से मुख़्तलिफ़ है

तुम्हारी आवाज़ में घुली ताज़गी से जाना
वहाँ का मौसम यहाँ के मौसम से मुख़्तलिफ़ है

बस इस को यक-तरफ़ा 'इश्क़ का मो'जिज़ा समझ लें
हम उस के जैसे हैं और वो हम से मुख़्तलिफ़ है

कहा तो था तुम से तुम यहाँ के लिए नहीं हो
तुम्हारा पैकर ही नस्ल-ए-आदम से मुख़्तलिफ़ है

जवान-‘उम्री में झुक गई है कमर हमारी
ये हिज्र का ख़म है 'उम्र के ख़म से मुख़्तलिफ़ है

तमाम रिश्ते हैं इक तरफ़ दूसरी तरफ़ माँ
ये एक तस्वीर सारे एल्बम से मुख़्तलिफ़ है

ये तुम जो कहते हो फ़र्क़ है 'इश्क़ और जुनूँ में
तुम्हारा मतलब है आब शबनम से मुख़्तलिफ़ है