उर्दू शायरी · ग़ज़ल

ye bhala kaisi inkisari hai

ये भला कैसी इंकिसारी है

یہ بھلا کیسی انکساری ہے

शायर: Umar Farhat7 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

ये भला कैसी इंकिसारी है
ज़िंदगी ख़ाक में गुज़ारी है

उस ने झेला है ये पहाड़ सा दिन
हम ने आँखों में शब गुज़ारी है

रात कैसे मिरी बसर होगी
जब कि ये शाम इतनी भारी है

दिल के जंगल में हैं अकेले हम
उस पे ये रात भी शिकारी है

बाद तेरे समझ नहीं आता
किस तरह की ये अश्क-बारी है

जिस को देखूँ उसे पुकारता हूँ
मुझ पे इक इस्म की ख़ुमारी है

तुम जिन्हें अश्क कह रहे हो 'उमर'
वो मोहब्बत की रेज़गारी है