उर्दू शायरी · ग़ज़ल

apna inkar kar chuka hun main

अपना इंकार कर चुका हूँ मैं

اپنا انکار کر چکا ہوں میں

शायर: Umar Farhat6 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

अपना इंकार कर चुका हूँ मैं
कार-ए-दुश्वार कर चुका हूँ मैं

या'नी वहशत में आप ही अपने
साए पर वार कर चुका हूँ मैं

जो कहानी में मरकज़ी ठहरे
वो भी किरदार कर चुका हूँ मैं

बे-सबाती पे आँख से गिर्या
हस्ब-ए-दरकार कर चुका हूँ मैं

अब नसीहत का फ़ाएदा ही नहीं
'इश्क़ आज़ार कर चुका हूँ मैं

ओढ़ कर हिज्र तेरा ऐ 'फ़रहत'
ख़ुद को बीमार कर चुका हूँ मैं