उर्दू शायरी · ग़ज़ल

diwar phalang kar aaya

दीवार फलाँग कर आया

دیوار پھلانگ کر آیا

शायर: Umar Farhat5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

दीवार फलाँग कर आया
सूरज का आधा साया

नागिन ने पलट पलट कर
देर तलक मुझ को डराया

था कोई और खंडर में
जिस ने वो चराग़ जलाया

कल शब पागल हो कर वो
फिर मेरे तन में समाया

उस के तन की रेत पे क्या
मैं ने कुछ ख़ाका बनाया