उर्दू शायरी · ग़ज़ल

yaqin se nikal gaya guman se nikal gaya

यक़ीन से निकल गया गुमान से निकल गया

یقین سے نکل گیا گمان سے نکل گیا

शायर: Faisal Mahmood5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

यक़ीन से निकल गया गुमान से निकल गया
मैं शश-जिहात घूमता जहान से निकल गया

तुम्हारे बा'द ज़िंदगी का हक़ अदा न हो सका
तुम्हारे बा'द मैं भी दास्तान से निकल गया

मैं जल चुका तो आज सब कुरेदते हैं राख को
मैं जल रहा था तब सभी के ध्यान से निकल गया

पलट के देखता हूँ मैं कि ज़िंदगी गुज़र चुकी
वो तीर भी तो अब मिरी कमान से निकल गया

सुख़न में दाद की कशिश मुझे भी खींचती रही
मैं बच-बचा के उस के दरमियान से निकल गया