उर्दू शायरी · ग़ज़ल

bar-e-digar hum ahl-e-hunar sochte nahin

बार-ए-दिगर हम अहल-ए-हुनर सोचते नहीं

بار دگر ہم اہل ہنر سوچتے نہیں

शायर: Faisal Mahmood5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

बार-ए-दिगर हम अहल-ए-हुनर सोचते नहीं
छाओं लुटाते वक़्त शजर सोचते नहीं

ये ज़िंदगी के मसअले तो साथ साथ हैं
आ बैठ मय-कदे में जिगर सोचते नहीं

कैसे कहाँ से हम को ये गर्द-ए-सफ़र मिली
कुछ सोचना तो चाहिए पर सोचते नहीं

गर चल पड़ा है साथ तो पीछे न मुड़ के देख
ऐ जान-ए-जाँ हम अहल-ए-सफ़र सोचते नहीं

हम ऐसे लोग 'इश्क़ में बस झूमते हैं दोस्त
बस झूमते हैं महव-ए-सफ़र सोचते नहीं