उर्दू शायरी · ग़ज़ल

hawa ka jhonka na koi aahaT kisi taraf se

हवा का झोंका न कोई आहट किसी तरफ़ से

ہوا کا جھونکا نہ کوئی آہٹ کسی طرف سے

शायर: Faisal Mahmood5 अशआरउपलब्ध: हिंदी, Roman Urdu, उर्दू

हवा का झोंका न कोई आहट किसी तरफ़ से
मैं ख़ुश-गुमानी में मुब्तला था तिरी तरफ़ से

'अजब सी हालत है आज दिल की मु'आफ़ करना
अगर किसी का भी दिल दुखा हो मिरी तरफ़ से

तुझे पता है सदाएँ आती हैं मुझ को शब भर
तू जिस जगह पर जुदा हुआ था उसी तरफ़ से

ये रफ़्ता रफ़्ता जो बुझ रहे हैं चराग़ मेरे
हवाएँ कैसी ये चल पड़ी हैं तिरी तरफ़ से

बस इक तरफ़ ही पड़ा हुआ हूँ कई दिनों से
मैं मुश्किलों में घिरा हुआ हूँ सभी तरफ़ से